शनिवार, 5 मई 2012

वो यादें.....








                           आज और कल मेरे दो पल
जिंदगी का हर मकसद हमारी जिदंगी का वो सीन बन जाता है जो कभी भूलते नहीं है.....
  • ख़ास वो भी मौसाद की तरह होता तो कितना अच्छा होता न तो वैसा होता न तो

  • ऐसा होता..कुछ चीजें वो भी होती है जिन्हें हम अपना तो लेते हैं लेकिन उन्हें मिटा

  • नहीं सकते फिर भी कभी-कभी याद तो कर लेते ही हैं..शायद किसी मोड़ पर वो

  • हमें याद आ जाती हैं.. तब हम उस पल को मुस्कराते हुए सोचते हैं...कितना अच्छा

  • था वो पल जिसे हमने गवा दिया ..और हसते हुए आगे बढ़ जाते हैं या फिर कुछ

  • करने लगते हैं ...जिंदगी का वो हिस्सा जिसे हम कभी हम भुला नहीं सकते हैं..कहानी

  • कुछ अच्छी भी होती हैं...तो कुछ बुरी भी लेकिन हर व्यक्ति अपनी जिंदगी का हर वो

  • पल बीता हुआ याद करता है तो उसमें कुछ तो नया यानि कि मजेदार तो जरुर होता

  • हैं..फिर  भी लोग न जाने क्यों अपने कल को भुलाने की कोशिश करते हैं...हर इंसान के

  • व्यवहार पर उसके विचार पर वक्तव्य को लेकर या फिर उससे के इंतजार का वो पल

  • आज भी याद करते तो होंगे ही... कहते लोग...कि...डूबने दे मुझे तुझे साहिल मिले....उम्र

  • भर ये दिल मुझे तड़पाएगा...तू आ भी जाएगा तो साथ तेरा मुझे याद आएगा...वो भी


  • उस छोटी सी जिंदगी का वो छोटा सा पल कभी हम भुला नहीं सकते तभी तो भाई

  • कुछ करना नहीं चाहतें है...बीते हुए कल को बस...बस...याद करना चाहते हैं......भले ही

  • उस से हमें मिलने वाला कुछ भी नहीं है फिर याद तो आ ही जाती है....दोस्तों.....

  • मै जीता हूं तो कुछ करने के लिए...लेकिन वो मन है कि कुछ करने ही नहीं देता


  • सोचता हूं कुछ नया करने की तो दिल गवाई नहीं देता....

  • डूब जाता हूं अपने बीते हुए कल की परक्षाईयों को तलाशने में कुछ घंटे

  • बीत जाते हैं ..मेरी तन्हाईंयों को समझाने में.... मैं करुं तो क्या करुं जमाने के लिए..अब

  • तो बस दिल कहता है...कुछ करो भी तो ऐसा करो जिसे तुम भुला ना पाओ......
  • शायद किसी ने खूब कहा कि...अगर जिंदगी जियो तो ऐसे जियो कि कोई तुम्हें भुला न
  • पाए..............                           ( मैं.....सतीश चन्द पाल)